रविवार, मई 10, 2009

कभी तो............ग़ज़ल


कभी तो दर्ज होगी जुर्म की तहरीर थानों में.
कभी तो रौशनी होगी हमारे भी मकानों में.

कभी तो नाप लेंगे दूरियाँ ये आसमानों की,
परिन्दों का यकीं क़ायम तो रहने दो उड़ानों में.


अजब हैं माइने इस दौर की गूँगी तरक्की के,
मशीनी लोग ढाले जा रहे हैं कारख़ानों में.


कहें कैसे कि अच्छे लोग मिलना हो गया मुश्किल,
मिला करते हैं हीरे कोयलों की ही खदानों में.


भले ही है समय बाक़ी बग़ावत में अभी लेकिन,
असर होने लगा है चीख़ने का बेज़ुबानों में.


नज़रअंदाज़ ये दुनिया करेगी कब तलक हमको,
हमारा भी कभी तो ज़िक्र होगा दास्तानों में.

27 टिप्‍पणियां:

विनय ने कहा…

कहें कैसे कि अच्छे लोग मिलना हो गया मुश्किल,
मिला करते हैं हीरे कोयलों की ही खदानों मे

बहुत बढ़िय शे'र लिखा है आपने

"अर्श" ने कहा…

BAHOT HI KHUBSURAT GAZAL KAHI HAI AAPEN SANJEEV JI... DHERO BADHAAYEE..

ARSH

नीरज गोस्वामी ने कहा…

संजीव भाई एक कामयाब ग़ज़ल कहने पर दिली मुबारकबाद कबूल करें...हर शेर इतना खूबसूरत बन पड़ा है की क्या कहूँ सिवाय वाह के...ऐसे ही लिखते रहें...
नीरज

चंदन कुमार झा ने कहा…

बहुत हीं खूबसूरत रचना.

चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है.......भविष्य के लिये ढेर सारी शुभकामनायें.

गुलमोहर का फूल

SWAPN ने कहा…

कहें कैसे कि अच्छे लोग मिलना हो गया मुश्किल,
मिला करते हैं हीरे कोयलों की ही खदानों में.

wah gautam ji , lajawab sher, benazeer gazal ke liye badhai sweekaren.

रश्मि प्रभा... ने कहा…

कहें कैसे कि अच्छे लोग मिलना हो गया मुश्किल,
मिला करते हैं हीरे कोयलों की ही खदानों में.
.... वाह !

दिगम्बर नासवा ने कहा…

नज़रअंदाज़ ये दुनिया करेगी कब तलक हमको,
हमारा भी कभी तो ज़िक्र होगा दास्तानों में.

वाह क्या तेवर हैं.............मज़ा आ गया ग़ज़ल पढ़ कर

मीत ने कहा…

नज़रअंदाज़ ये दुनिया करेगी कब तलक हमको,
हमारा भी कभी तो ज़िक्र होगा दास्तानों में.

क्या बात है साहब. बहुत खूब !

प्रकाश गोविन्द ने कहा…

bahut achhi gazhal hai

mubaarakbad

दिल दुखता है... ने कहा…

हिंदी ब्लॉग की दुनिया में आपका तहेदिल से स्वागत है...बेहतरीन रचना...

anurag ने कहा…

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति . बधाई

रवि कुमार, रावतभाटा ने कहा…

भले ही है समय बाक़ी बग़ावत में अभी लेकिन,
असर होने लगा है चीख़ने का बेज़ुबानों में

बेहतर....बढिया ग़ज़ल...

venus kesari ने कहा…

मतला से ले कर मकते तक शानदार गजल
आपका वीनस केसरी

Mumukshh Ki Rachanain ने कहा…

अजब हैं माइने इस दौर की गूँगी तरक्की के,
मशीनी लोग ढाले जा रहे हैं कारख़ानों में.

कहें कैसे कि अच्छे लोग मिलना हो गया मुश्किल,
मिला करते हैं हीरे कोयलों की ही खदानों में.

सुन्दर ग़ज़ल के उपरोक्त शेर दिल को छू गए.

बधाई स्वीकार करें

चन्द्र मोहन गुप्त

abhivyakti ने कहा…

भले ही है समय बाक़ी बग़ावत में अभी लेकिन,
असर होने लगा है चीख़ने का बेज़ुबानों में

आप की रचना प्रशंसा के योग्य है . लिखते रहिये
चिटठा जगत मैं आप का स्वागत है

गार्गी

नीरज कुमार ने कहा…

कहें कैसे कि अच्छे लोग मिलना हो गया मुश्किल,
मिला करते हैं हीरे कोयलों की ही खदानों में.


Wah-wah...
Aur kuchh kahna chhote Muhn Badi Baat hogi...

Babli ने कहा…

मेरे ब्लॉग पर आने के लिए और सुंदर टिपण्णी देने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ! आपने बिल्कुल सही फ़रमाया शायरी के साथ मेरी बनाई हुई पेंटिंग है! मैंने सोचा कि जब मैं पेंटिंग करती हूँ तो क्यूँ न अपने शायरी के साथ दूँ ताकि और बेहतर हो !
बहुत ही उम्दा ग़ज़ल लिखा है आपने! बहुत अच्छा लगा आपका ब्लॉग!

गौतम राजरिशी ने कहा…

शुक्रगुजार संजीव जी आपका पहले तो हौसलाअफ़जाई के लिये और फिर आपकी आमद के लिये...वर्ना मैं तो आपके इस खजाने से वंचित ही रह जाता ...
नवगीत की पाठशाला पर ही आपके उस गीत ने मन मोह लिया था और अब इन ग़ज़लों ने सारी कसर पूरी कर दी
"हमारा भी कभी तो ज़िक्र होगा दास्तानों में"
यकीनन संजीव जी

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

अवश्य ही ज़िक्र होगा इतना सुन्दर लिखने के लिए...

बेनामी ने कहा…

संजीव जी मेरी गुल्‍लक में आने और मेरा हौसला बढ़ाने के लिए शुक्रिया।

राजेश उत्‍साही

ललितमोहन त्रिवेदी ने कहा…

अज़ब ही मायने .............बहुत खूब संजीव जी ! निहायत ही खूबसूरत ग़ज़ल , भीड़ से कुछ हटकर ! बधाई !

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

भाई लाजवाब लिखते हैं आप तो. आपका आज ही पता चल रहा है. बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

ललितमोहन त्रिवेदी ने कहा…

भाई संजीव जी ! आपके प्यार और सम्मान से अभिभूत हूँ मैं ! आपकी सभी रचनाएँ स्तरीय है नवगीत से लेकर ग़ज़ल तक ! आपका मिलना एक शुभ संकेत है , निरंतरता बनाये रखियेगा ! कभी ग्वालियर आयें तो मिलिएगा !

dwij ने कहा…

आपको इस ग़ज़ल के लिए बहुत-बहुत बधाई

परिन्दों का यक़ीँ क़ायम तो रहने दो उड़ानों में

अंकित "सफ़र" ने कहा…

नमस्कार संजीव जी
बेहतरीन ग़ज़ल कही है आपने.

M VERMA ने कहा…

बहुत ही नफासत वाली गज़ल
उम्दा शेर --
बहुत खूब