तुम ज़रा यूँ ख़याल करते तो.
मुश्किलों से विसाल करते तो.
ज़िन्दगी और भी सरल होती,
इसको थोड़ा मुहाल करते तो.
मंज़िलों के निशाँ बता देते,
रास्तों से सवाल करते तो.
हार जाते घने अँधेरे भी,
कोशिशों को मशाल करते तो.
यूँ न होते उसूल बेइज्ज़त,
इनकी तुम देखभाल करते तो.
सोमवार, जून 05, 2006
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2 टिप्पणियां:
sahi kaha,koshis hi rah ko roshan karti hai, manzil par vahi pahunchte hain jo koshis karte hain
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